महन्त सन्त बाबा सुखदेव सिंह जी की गद्दीनशीनी के दस वर्ष:

 महन्त सन्त बाबा सुखदेव सिंह जी की गद्दीनशीनी के दस वर्ष:  

                           इस समागम को जोड़ मेला ही क्यों कहा जाता है : भाई हरनाम सिंह जी खालसा

किसी काम काज के लिये घर से निकालें तब अरदास करके जाऐ, आपके पहुंचने से पहले ही वहां गुरु नानक देव जी पहुंच जाएंगे: भाई भजन सिंह लहरी


लबाना न्यूज/ जी. एस. लबाना ।
अजमेर । ढ़ेरा सन्त बाबा हिम्मत सिंह साहब दरबार, जिसे समाज में अधिकतर भाई हिम्मत सिंह साहिब की दरबार की नाम से जाना जाता है, 

  के 16वें गद्दीनशीन महन्त सन्त भाई सुखदेव सिंह जी की  गद्दीनशीन महन्तताई के 10 वर्ष पूरे हो चुके चुके है। 


    5 अप्रैल 2013 को भाई सुखदेव सिंह जी को आल इंडिया लबाना सिख पंचायत की सहमती से पहाड़ गंज, नई दिल्ली स्थित ढ़ेरा सन्त बाबा  हिम्मत सिंह साहब दरबार में पगड़ी बन्धाकर ढ़ेरे की महन्तताई  अर्थात गद्दी सौपी गयी थी। 


    इससे पहले  महन्तताई की गद्दी पर सन्त बाबा करतार सिंह जी बिराजमान थे जोकि 23 मार्च 2013 को ब्रह्मलीन हुए थे ।


   भाई सुखदेव सिंह जी ने ढ़ेरे की गुरुगद्दी पर बैठने के साथ ही सम्पादक को कहा था कि " सबकी सलाह से सबको साथ लेकर समाज सेवा का काम करेंगे" । 


     भाई सुखदेव सिंह जी का यह  कथन लबाना जागृति सन्देश के 16 अप्रैल 2013 को प्रकाशित  अंक में प्रथम पृष्ठ पर छपा है।


     यूं तो दास गोपाल सिंह लबाना, 1990 में लबाना जागृति सन्देश के प्रकाशकन के बाद कई बार ढ़ेरे में संगत के दर्शन करने पहूंचे, 


    लेकिन कुछ अर्से   बाद 22, 23 व 24 जून 2023 को भाई हिम्मत सिंह साहब दरबार नई दिल्ली में आयोजित 75वें वार्षिक जोड़ मेले में महन्त सन्त भाई सुखदेव सिंह जी की कृपा से संगत के दर्शन करने का दास को  सौभाग्य प्राप्त हुआ  ।


     इन तीन दिनों में दास ने यहां रहकर जो देखा और अनुभव किया कि वास्तव में गुरुगद्दी मिलने के बाद भाई सुखदेव सिंह जी ने जो कहा था जैसा उपर लिखा है कि " सबकी सलाह से सबको साथ लेकर समाज सेवा का काम करेगे" अपनी कथनी पर खड़े उतरे है, 


     उससे भी कहीं ज्यादा सबको साथ लेकर सब के साथ जो सेवा की है उसकी प्रशंसा किये बगैर दास नहीं रह सकता।


    सबको साथ लेकर सेवा निभाई है उनके प्रमाण मुझे उक्त तीन दिवसीय 75वें वार्षिक जोड़ मेले में देखने और सुनने को मिले।


    ढ़ेरे में बिल्डिंग के कार्य पर अब तक पिछले 10 वर्षों में  नव-निर्माण, रिपेयरिंग का बहुत  काम हुआ है इसमें तृतीय तल पर  नया लंगर हाल, 

     द्वितीय तल पर दरबार साहिब का हाल जिसमें आवश्यकता अनुसार ऐसी लगी हुई  हैं ।


    जिससे दरबार साहिब जहां साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश है वह पूरा हाल एयरकन्डीशन हाल लगता है 

    और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिये निवास के लिये कमरे, हर कमरे में एसी लगी है, ग्राउन्ड फ्लोर पर भी कमरे व बड़ा हाल बना हुआ है  ।

     

जिनमें भी ऐसी लगी है जरूरत के अनुसार यहां आने वाले श्रद्धालु एवं विद्यालय के छात्र आदि रहते हैं।


 गुरुद्वारा परिसर में नीचे उपर सभी जगह फर्श आदि साफ सुथरा बना हुआ है, संगत की सुविधा के लिये यहां लेट-बाथरूम पर्याप्त मात्रा में बने हुए है, 


     इन सब का जिक्र  इसलिये कर रहा हूं कि ढेरे में दास का आना जाना 13वें गद्दीनशीन महन्त  सन्त बाबा बिजय सिंह साहिब के समय से रहा है,

 तब बाबा बिजय सिंह साहिब का अधिक समय अजमेर के ढेरे में ही गुजरता था, और 14वें गद्दीनशीन महन्त सन्त बाबा ब्यान सिंह साहिब का समय बम्बई ढेरे में व्यतीत हुआ था, 15वें महन्त सन्त बाबा करतार सिंह जी के समय-काल तक कारण कुछ भी रहे हो  ढेरे की प्रगति की रफ्तार नहीं बना पाई थी। 

     

15वें गद्दीनशीन महन्त सन्त बाबा करतार सिंह जी के आसपास कुछ विवादित परिस्थितियां पैदा हो गई थीं, 

   

   यही कारण रहा कि 16वें गद्दीनशीन महन्तताई पर गद्दी सौंपने के लिये समाज को बहुत मशकत करनी पड़ी थी,

     महन्त करतार सिंह जी  के बाद ढ़ेरे के तीन सेवादारों के नाम संगत के सामने थे, भाई चरन जीत सिंह दास (जो सिन्धी समाज से था, और अजमेर की दरबार मे सेवा करते थे) दूसरा भाई गुरमीत सिंह जी जो कल्याण (मुम्बई-महाराष्ट्र) दरबार में सेवा करता था, और लबाना सिख समाज का ही था, 

     तीसरे भाई सुखदेव सिंह जी जो लबाना समाज से ही है, इन तीनों में एक नाम चयनित करना, 


और समयानुसार उतपन्न हुई परस्थियां पर विचार करना, इन सब के मध्य नज़र,  यहां तक कि समाज में ऐसे  सुर उभर कर आये थे  

    कि ढ़ेरे में महन्त प्रथा को ही खत्म करके कमेटी बनाई जाए, या जो सेवादार हैं उनको सेवादार रखकर  देख भाल के लिये कमेटी बनाई जाए, 

     

  यह सब बातें लबाना जागृति सन्देश के 16 अप्रैल 2013 के अंक में  छपी है, जो पाठकों लिये  यहां नीचे पोस्ट की जा रही है ।


    लेकिन एक बात तो स्पष्ट तौर पर दास दावे के साथ कह सकता है कि  महन्त सन्त  बाबा ब्यान सिंह साहिब जी ने दास गोपाल सिंह लबाना को एक बात कही थी -

     कि भाई हिम्मत सिंह जी का ढ़ेरा पहुंचे हुए सन्तों का ढ़ेरा है और वे सन्त अपने दर की सेवा के लिये अपने सेवादार खुद ही खोज लेते हैं, बाबा ब्यान सिंह साहिब जी का यह कथन बहुत बड़ा अनमोल कथन  है । 


  और शायद आज तक बाबा ब्यान सिंह साहिब के कथनानुसार ही ऐसा ही होता आया है, कुछ संगत महन्तताई के विरुद्ध थी, 

      फिर भी बड़ी संख्या में मौजूद लबाना सिख समाज की संगत  ने सन्त मोहन सिंह जी की अगुवाई में लबाना सिख समाज के गणमान्य  साध संगत के सहयोग से गुरु महाराज के समक्ष अरदास कर बाबा ब्यान के तीन सेवकों  में सबसे बड़े सेवक, या यूं कहें सेवाभावी, नितनेमी,  विनम्रता, या जिस पर  गुरुबाणी शब्द अनुसार "नानक नदरी नदर निहाल" गुरुरुप साध  संगत की दृष्टि  भाई सुखदेव सिंह जी पर पड़ी और उन्हें  महन्तताई सौपी गई । 


 और बाकी दो सेवादारों भाई चरन सिंह जी दास व भाई गुरमीत सिंह जी को भाई सुखदेव सिंह जी जो महन्त बन चुके थे के दावेदारों की पदवी से नवाजा।



महन्त सन्त भाई सुखदेव सिंह जी की महन्तताई के बाद पिछले 10 वर्षों में  दिल्ली, अजमेर और बम्बई के ढेरे के काम काज की रफ्तार बड़ी है। 


दास यह कहते हुए गर्व महसूस कर रहा है कि महन्त सन्त भाई सुखदेव सिंह जी ने ढ़ेरे को अपना तपोस्थान, अपनी कर्मभूमि समझकर  संगत की सहूलियत के लिये जो सेवा कर रहे है और ढ़ेरे में जो सुविधाओं का विस्तार किया है वह तारीफें काबिल है। 


 महन्त जी ने सिर्फ बिल्डिंग का ही विस्तार नहीं किया परन्तु ढ़ेरे के प्रति साध संगत का विश्वास और ढ़ेरे में श्र्द्धालुओं की तादाद को पहले से बहूत ज्यादा बढ़ाई है । 


महन्त जी ने यह सब सबको साथ लेकर सबके साथ मिलकर किया है जिसकी जिवंत मिसाल दास को उक्त तीन दिवसीय 75वें जोड़ मेले के समागम में देखने और सुनने को मिली।


   जहां आयोजित शब्द कीर्तन दरबार में  गुरुद्वारा शीश गंज साहिब के हैड ग्रन्थी कथा वाचक भाई हरनाम सिंह जी खालसा ने कहा कि इस ढ़ेरे के महन्त सन्त भाई सुखदेव सिंह जी जब भी कोई ढ़ेरे के लिये सेवा बताते हैं दास उसको पूरी करने खुशी महसूस करता है कि गुरुदेव ने सेवा बख्शीश की है, 


 भाई खालसा जी ने कहा कि यहां श्रद्धालुओं का प्रेम देखने को मिलता है बाहर कितनी गर्मी है, इस गर्मी में भी काशीपुर से श्रद्धालु अपनी गाड़ी करके आए हैं यह महन्त जी का प्यार है, यहां आकर इस सन्त महापुरुषों के दर्शन करके  ठंडक और  कितनी राहत मिलती है, कथा वाचक खालसा जी  ने कहा है  काशीपुर ही नहीं यहां इस जोड़ मेले में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दूर दूर से संगत आई है,

    यह सब महन्त जी का प्यार है और सन्त बाबा  हिम्मत सिंह साहिब की कृपा है जहां सबकी मनोकामना पूरी होती है। 


कथा वाचक खालसा ने कहा कि मैं सोच रहा था कि इस समागम को जोड़ मेला ही क्यों कहा जाता है, इन्होनें कहा कि वास्तव में यह जोड़ मेला ही जो हमें अपने  गुरु से जोड़ता है, हमें आपस में जोड़ता है,

   

  इन्होने कहा कि जोड़ना बड़ा पुन्य है और तोड़ना  बड़ा पाप है, कथा वाचक खालसा ने दास की ओर देखते हुए कहा कि  अजमेर से  प्रकाशित लबाना जागृति सन्देश के मैने कई लेख समाचार पढ़े हैं इन्होने हमेशा समाज को जोड़ने का काम किया है,

    

 महन्त जी भी हम सभी का  पूरा सत्कार करते हैं आपस में जोड़ने का काम करते है । 


कीर्तन दरबार में शब्द कीर्तन के दौरान भाई हरभजन सिंह जी लहरी (श्री गंगानगर वाले) ने कहा कि कुछ समय पहले मेरा कोई काम रुका हुआ था बहुत परेशानी हो रही थी मैने  महन्त  सन्त बाबा  सुखदेव सिंह जी से अरदास करवाई, महन्त जी की कृपा से बाबा भाई हिम्मत सिंह साहब ने वह काम कर दिया  आज उसी का शुकराना करने आया हूं यह कहते हुए शब्द कीर्तन के दौरान  भाई लहरी ने आगे कहा कि अरदास में बहूत बड़ी ताकत है आप जब भी किसी काम काज के लिये घर से निकालें तब अरदास करके जाऐ, 

आपके पहुंचने से पहले ही वहां गुरु नानक देव जी  पहुंच जाएंगे, आपकी फतह होंगी, भाई लहरी जी ने कहा कि भाई सुखदेव सिंह जी का प्यार सत्कार के सदके  आज मुझे यहां आप संगत के दर्शन हुए है ।


समागम में दिल्ली गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी के मीत प्रधान भाई आत्मा सिंह लबाना ने अपने विचार जाहिर करते हुए कहा कि भाई सुखदेव सिंह जी जब भी कोई भाई हिम्मत सिंह साहब दरबार की सेवा के लिये मुझे हुक्म करते है मैं  हमेशा तैयार रहता हूँ यह सब भाई सुखदेव सिंह जी जी का प्यार और सत्कार है, 

   इनका प्यार और सत्कार वाला स्वभाव ही हमें ढ़ेरे की सेवा के लिये प्रेरित करता है। 


गुरुबाणी शब्द कीर्तन दरबार में बीबी चरनजीत कौर खालसा के साथ पंथ के अन्य प्रसिद्ध रागी सींगों ने गुरुबाणी हरजस गायन कर संगत को निहाल किय।

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16  अप्रैल 1913 का अंक अवलोकन करें 👇









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सम्पादक, दास गोपाल सिंह लबाना क्षमा का जाचक है कि इस समाचार को जून 2023 में जोड़ मेले के सम्माप पर प्रकाशित करना था लेकिन कुछ समयाभाव के कारण देरी हुई है और जोड़ मेले के समाचार को महन्त सन्त बाबा  सुखदेव सिंह जी के साथ जोड़ा गया है।

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*वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतह*

गोपाल सिंह लबाना 

सम्पादक 

लबाना जागृति सन्देश, 

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